Articles in Hindi
नदियों की आवाज
एक ओर हम १८५७ के शहीदों के याद करते हुए आजादी का पहला जंग का जश्न मना रहे हैं. उधर हमारे जीवन के आधार - जल,
जमीन, जंगल, अन्न - पर विदेशी कम्पनियां नियन्त्रण कायम कर रही हैं. क्या हमारी आजादी बच पायेगी? राजेन्द्र सिंह की प्रस्तुती,यह लेख पी.एन.एन. द्वारा प्रकाशित की
गई.
जमुना की मौत और कामनवेल्थ खेल
कामनवेल्थ खेल के बहाने दिल्ली की भूमाफ़िया यमुना के तट पर जमीन पर गैरकानूनी कब्जा कर रही है. उधर
सरकार सिर्फ़ झुग्गियां जलाने मे लगी हुई है - लाखों बेघर हो गये हैं. और जमुना नदी मर रही है. शिराज केसर की प्रस्तुती यह लेख पी.एन.एन. द्वारा प्रकाशित की गई..
इप्टा का दूसरा राज्य सम्मॆलन संपन्न
भारतिय जन नाट्य संघ (इप्टा), झारखंड का तीन दिवसीय, दूसरा राज्य सम्मेलन, १४ अप्रॆल को झारखंड के
वरिष्टतम लोक गायक भरत नायक और कई राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय संस्क्रीतिकर्मियों की उपस्थिति मे> सम्पन्न हुआ. अलोका कुजूर की प्रस्तुति.
महिलाओं पर अत्यचार को राज्य सरकार ने अनदेखा किया
जबकि ४० से ज्यादा कानून महिलाओं के हक और सुरक्शा के लिए बनाये गयें हैं, फ़िर भी हर रोज महिलाएं पिट
रही हैं, मौत हो रहीं हैं - कही कानून से सुरक्शित नहीं हैं. अलोका कुजूर आलेख करती हैं.
कोका कोला ने बल्लिया में प्रदूषित पदार्थ
फ़ैंका
बल्लिया मे स्थित कोका कोला की बोतल-भरती फ़ैक्टरी ने अपनी प्रदूषित पदार्थ बाहर के खेथ में डाल रखा है - पास के गांव-वासी ने परखने पर पता लगाया. इंडिया रिसोर्स
सेंटर की रिपोर्टैं.
रिवा में आदिवासियों का संघर्ष जारी
मध्य प्रदेश के रिवा जीले के गांद मे आज भी पुलीस दमन जारी है.
झाड्खणड जंगल बचाओ आंदोलन से जुडी हुई, अलॊका कुजूरे, लिखते हैं.
झाड्खणड जंगल बचाओ आंदोलन से जुडी हुई, अलॊका कुजूरे, लिखते हैं.
Netaji's Speech on Bahadur Shah Zafar
As India celebrates the 150th Anniversary of the 1st War of Independence (1857), we refer to Aflatoon’s presentation of Netaji Subhash Chandra Bose’s speech on 11th July 1944 to the Azad Hind Fauj and his reference to this
First War of Independence. It is especially poignant to listen to Netaji’s reference to Bahadur Shah Zafar.
जंगल पर हक जताने का संघर्ष
भारत मे ’बाघ या मानव’ और ’जंगल या आदिवासी’ की चल रही गर्मागर्म बहस के बीच मध्य प्रदेश के
पिपरिया तहसील मे आदिवासियों ने अपने अधिकारों की मांग को लेकर खास तरह से विरोध दर्ज किया.
अफ़लातून की प्रस्तुती
अफ़लातून की प्रस्तुती
गांधीजी और हिन्दु
राष्ट्र
उपभोक्तावादी संस्कृतिजब् १९४२ मे कुछ् संगठनों ने नारा लगाया कि भारत सिर्फ़ हिन्दुओं के लिये है तो हरिजन ( पृष्ट : २६१ ) में गांधी जी ने उसका जवाब लिखा. अफ़्लातून प्रस्तुत करते हैं
वो लेख और उल्लेख करते हैं उसका मूल.
सच्चिदानन्द सिन्हाजी की पुस्तिका 'उपभोक्तावादी संस्कृति : गुलाम मानसिकता की अफ़ीम' की कडियां.
अफ़्लातून की प्रस्तुति.
I cannot hope to work towards equality and justice, towards non violence, till I stop dominating other opinions, other voices.